भाई दूज – भैया दूज पर निबंध

वैसे तो हमारे हिन्दू धर्म मे कई त्योहार होते है और सभी का अपना  अपना अलग ही महत्व होता है। जिन्हें हम हर्षोल्लास के साथ मनाते है। उनमें से ही एक त्योहार ” भैया दूज ” । जो कि भाई बहन के रिश्तों का प्रतीक माना जाता है। भारतीय समाज मे इस त्योहार का महत्वपूर्ण स्थान है। वैसे हमारे भारत की संस्कृति ही काफी है ! इन रिश्तों को मजबूत करने के लिए परंतु इन रिश्तों में ओर मजबूती ओर प्रेम और स्नेह को बढ़ाने के लिए ही भाई दूज का त्यौहार मनाने की परंपरा है। जिन्हें हमारे हिन्दू धर्म मे देवी देवताओं के मनाने के कारण ही हमारी संस्कृति में इसका महत्वपूर्ण स्थान है। ओर पौराणिक काल से चले आ रहे त्योहार को हम पूरी श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाते है। इन्हें बदलना ओर इसमें कुछ भी बदलाव हम कभी भी लाने की कोशिश नही करते ओर इसलिए भाई दूज रिश्तों को मजबूती प्रदान करने वाला त्योहार है।दीवाली के दो दिन बाद मनाने वाले इस त्योहार के पीछे कई ऐतिहासिक और पौराणिक कथा मिलती है। उन्ही पौराणिक कथाओं के अनुसार एक कथा इस प्रकार है की भगवान सूर्य नारायण की पत्नी का नाम छाया था। उन्होंने यम ओर यमुना नाम के पुत्र और पुत्री को जन्म दिया था। जब यमुना का विवाह हो गया तब यमुना अपने भाई यम को भोजन ग्रहण करने के लिए बुलाती थी। यम ने कई बार अपनी बहन का प्रस्ताव ठुकरा दिया वो सोचने लगा कि इस धरती पर कोई भी नही चाहेगा कि में उसके घर आउ क्योंकि में तो प्राणों को हरने वाला यमराज हु। पर मेरी बहन फिर भी मेरे को बार – बार आग्रह करके क्यों बुलाना चाहती है। परंतु कई बार अपनी बहन के आग्रह करने पर यम अपनी बहन के घर गए । जाने से पहले यमराज ने राह में आये जो भी नर्कवासी थे उन्हें उनके इस पाप से मुक्त कर दिया और जब बहन के घर गए तो बहन की ख़ुशी का ठिकाना नही रहा सबसे पहले उसने स्नान करके अपने भाई को माथे पर तिलक करके तरह तरह के व्यंजन परोसे, ओर जब भाई यम जाने लगा तो उन्होंने अपनी बहन यमुना को वरदान दिया कि आज के दिन जो भी बहन यमुना में स्नान करके अपने भाई को तिलक करके भोजन करवाएगी तो उसको ओर उसके भाई को यमराज का भी डर नही होगा । तभी से इस त्योहार का नाम यम दित्तिया पड़ गया है।

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