भारतीय न्यायपालिका

इस बात को स्वीकारना बहुत कठिन है की वर्षो से लोगों के विश्वास का केंद्ररही भारतीय न्यायपालिका अब लोगों का विश्वास खो रही है | लेकिन बदलते हालातों ने इस बात की गवाही दी है की यही सच है ये बात तो हम सभी जानते है की कोई भी संस्थान अगर लोगों का विश्वास खो दे तो उसका पतन निश्चित है | इसलिए यह जरुरी है की हम इस बात का अवलोकन करें की आखिर क्यों हमारी न्यायपालिका लोगों का विश्वास खो रही है | इसके पीछे की वजह क्या है |हाल ही के दिनों में सबरीमाला मंदिर, व्यभिचार, तीन तलाक तथा अन्य मुद्दों पर इसके द्वारा दिए गए निर्देशों, का क्या प्रभाव पड़ा है क्या सरकार से खींचतान की लड़ाई या इसके अंदरूनी लड़ाई इसके लिए घातक हो रहें हैं ?आगे आने वाले समय में आयोध्या जैसे मामले इसकी परीक्षा लेने के लिए तैयार है | भारत एक ऐसा देश है जहाँ धर्म के नाम पर लोग कुछ भी करने के लिए तैयार रहते है यहाँ तक की विद्रोह भी,और पिछले कुछ दिनों से लोगों को यह लग रहा है की न्यायपालिका उनके धर्म को सम्मान नहीं कर रही है,इसलिए इस बात की सम्भावना से इंकार नहीं किया जा सकता की लोग न्यायपालिका के खिलाफ भी विद्रोह कर सकते है | इन्ही सब बातों को ध्यान में रख के अब भारतीय न्यायपालिका को साडी बातों का अवलोकन करके कदम बढ़ाने की जरूरत है | इस लेख के माध्यम से इन सभी कारणों को विस्तृत रूप से विश्लेषण किया गया है |

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