भाषा संस्कृति का अभिन्न अंग

भाषा संस्कृति का अभिन्न अंग है। इसी संदर्भ में हिमाचल प्रदेश दोनों ही पक्षों से समृद्ध है। अधिकतर जनसंख्या अभी भी ग्रामों में बसती है। दैनिक क्रियाकलापों में कहावतों का प्रयोग सदियों से होता आया है। ये कहावतें अनुभव पर आधारित होती हैं । समय और संदर्भ के अनुसार इसका प्रयोग लोगों के अनुभव को दर्शाता है। अपने मत की पुष्टि या किसी की गलती बताने, शिक्षा देने आदि में इनका प्रयोग कारगर सिद्ध होता है। इनसे सामने वाला व्यक्ति निरूत्तर हो जाता है जो कि कहावतों का प्रयोग करने वालों की भाषिक क्षमता को सिद्ध करती है। ऐसी ही कुछ हिमाचली कहावतों का परिचय इस आलेख में दिया गया है।

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